Gayatri Mantra 108 Times: ऋषि विश्वामित्र ने पहली बार जनता को बताया था यह मंत्र

Gayatri Mantra 108 Times: गायत्री मां को ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का ही खास रूप माना जाता है। इसीलिए, लोग इन्हें त्रिमूर्ति मानकर पूजा करते हैं। इनका मंत्र युवाओं को सफलता और सुरक्षा देता है, जिसे पहली बार ऋषि विश्वामित्र ने लोगों के लिए बोला था। आइए जानते हैं वह शक्तिशाली गायत्री मंत्र क्या है।

मां गायत्री कैसी दिखती हैं?

धर्मग्रंथों के अनुसार ब्रह्मा, विष्णु और महेश का खास रूप मां गायत्री के पांच मुख और दस हाथों में है। इन पांच मुखों में से चार मुख चार वेदों का प्रतीक हैं, जबकि पांचवा मुख मां की सर्वशक्तिमान शक्ति को दर्शाता है। गीता में मां के दस हाथ भगवान विष्णु का प्रतीक माने गए

गायत्री मंत्र से मिलती है खुशी, संपन्नता, लंबी उम्र और प्रसिद्धि।

महाभारत के लेखक वेद व्यास जी ने भी गायत्री मंत्र की महिमा का वर्णन किया है। अगर किसी तरह से गायत्री मंत्र को सिद्ध कर लिया जाए, तो यह सभी इच्छाओं को पूरा करने वाली कामधेनु गाय के समान होता है। गायत्री मंत्र का जाप करने से मनुष्य की आध्यात्मिक चेतना का पूरा विकास होता है और सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं, क्योंकि देवी मां भक्त के चारों ओर रक्षा-कवच बना देती हैं। योग की विधियों में भी इस मंत्र का असर बहुत प्रभावी होता है।

Gayatri Mantra 108 Times

भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि मनुष्य को अपने कल्याण के लिए हमेशा गायत्री और ॐ ध्वनि का उच्चारण करना चाहिए, क्योंकि यह बहुत ही शक्तिशाली है और नकारात्मकता को दूर करता है। मां गायत्री मनुष्य को आयु, प्राण, शक्ति, कीर्ति, धन, सुख, समृद्धि, खुशहाली, सिद्धि और ब्रह्म तेज देती हैं। इनकी उपासना से मनुष्य को सभी कुछ आसानी से मिल जाता है और सभी बिगड़े काम बन जाते हैं।

मां गायत्री का मंत्र 

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्यः धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥

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